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क्या खेती की मशीन किराये पर लेना फायदेमंद है? जानिए 7 बड़े लाभ

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By Tractor GyanJan 07, 2026 12:40 PM
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आज की खेती पहले जैसी नहीं रही। अब खेती सिर्फ मेहनत पर नहीं, बल्कि सही मशीनों और सही फैसलों पर भी निर्भर करती है। ट्रैक्टर, रोटावेटर, हार्वेस्टर, सीड ड्रिल जैसी आधुनिक मशीनें खेती को तेज़, आसान और अधिक उत्पादक बनाती हैं।
 लेकिन हर किसान के लिए ये सभी मशीनें खरीदना संभव नहीं होता। ऐसे में एक सवाल अक्सर मन में आता है — क्या खेती की मशीन किराये पर लेना वाकई फायदेमंद है?
इस लेख में हम इसी सवाल का जवाब विस्तार से देंगे और जानेंगे खेती की मशीन किराये पर लेने के 7 बड़े फायदे, जो आज के समय में किसानों के लिए बेहद ज़रूरी हैं।

खेती में मशीनों की बढ़ती जरूरत

भारत में खेती का रकबा छोटा होता जा रहा है, मजदूर महंगे हो रहे हैं और समय पर काम पूरा करना सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।  बीज बोने से लेकर कटाई तक हर काम का सही समय होता है। अगर काम देर से हुआ तो उत्पादन सीधा प्रभावित होता है। यही कारण है कि आज किसान मशीनों पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। लेकिन हर मशीन खरीदना महंगा सौदा साबित हो सकता है।

खेती की मशीन किराये पर लेने का मतलब क्या है?

खेती की मशीन किराये पर लेने का मतलब है कि किसान जरूरत के समय ट्रैक्टर या दूसरी कृषि मशीनें कुछ घंटों या दिनों के लिए किराये पर इस्तेमाल करता है।
 काम पूरा होने के बाद मशीन वापस कर दी जाती है और किसान को सिर्फ तय किराया देना होता है।

आज कई जगहों पर:

  • कस्टम हायरिंग सेंटर
  • किसान उत्पादक संगठन (FPO)
  • निजी मशीन मालिक
  • डिजिटल एग्री प्लेटफॉर्म

के ज़रिये मशीनें आसानी से किराये पर मिल जाती हैं।

खेती की मशीनें किराये पर लेने से मिलने वाले लाभ

1. भारी निवेश से बचाव होता है

खेती की मशीन खरीदना एक बड़ा निवेश होता है।

उदाहरण के लिए:

छोटे और मध्यम किसानों के लिए इतना पैसा लगाना आसान नहीं होता। मशीन किराये पर लेने से किसान को लाखों रुपये का खर्च एक साथ करने की जरूरत नहीं पड़ती।
यह पैसा किसान बीज, खाद, सिंचाई और दूसरी जरूरी चीजों में लगा सकता है।

2. रखरखाव और मरम्मत की चिंता खत्म

मशीन खरीदने के बाद सिर्फ खरीदारी का खर्च नहीं होता, बल्कि:

  • सर्विस
  • डीज़ल
  • पार्ट्स बदलवाना
  • खराबी की मरम्मत

इन सब पर भी लगातार पैसा लगता है।
किराये की मशीन में ये सारी जिम्मेदारी मशीन मालिक की होती है। अगर मशीन खराब हो जाए, तो किसान की जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता। इससे खेती का खर्च नियंत्रित रहता है और तनाव भी कम होता है।

3. छोटे किसानों के लिए सबसे अच्छा विकल्प

भारत में ज्यादातर किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनके पास 1–3 एकड़ जमीन होती है। ऐसे किसान साल में कुछ ही दिनों के लिए मशीन का उपयोग करते हैं। पूरे साल खड़ी रहने वाली मशीन खरीदना उनके लिए फायदे का सौदा नहीं होता। किराये की मशीन उन्हें कम लागत में आधुनिक खेती का फायदा देती है।

4. सही समय पर खेती संभव होती है

खेती में समय बहुत अहम होता है। बीज बोने या फसल कटाई में अगर देर हो गई, तो नुकसान तय है।

किराये की मशीनें:

  • जल्दी उपलब्ध होती हैं
  • कम समय में ज्यादा काम करती हैं
  • मजदूरों पर निर्भरता घटाती हैं

इससे किसान सही समय पर खेती के हर चरण को पूरा कर पाता है।

5. नई तकनीक और आधुनिक मशीनों का लाभ

जब किसान मशीन खरीदता है, तो वह सालों तक उसी मशीन पर निर्भर रहता है।
 लेकिन तकनीक हर साल बदल रही है।

किराये पर मशीन लेने से किसान:

  • नई और अपडेटेड मशीनें इस्तेमाल कर सकता है
  • अलग-अलग फसलों के लिए अलग मशीन आज़मा सकता है
  • बिना जोखिम नई तकनीक सीख सकता है

इससे खेती ज्यादा स्मार्ट और आधुनिक बनती है।

6. मजदूरों पर निर्भरता कम होती है

आज गांवों में मजदूर मिलना मुश्किल और महंगा होता जा रहा है।
 मशीनें वही काम कम समय में और कम लोगों से कर देती हैं।

किराये की मशीन:

  • मजदूरी खर्च घटाती है
  • काम की गति बढ़ाती है
  • थकान और मानवीय गलती कम करती है

खासकर कटाई और बुवाई के समय यह बहुत बड़ा फायदा साबित होता है।

7. खेती का कुल खर्च कम होता है

जब किसान मशीन किराये पर लेता है, तो:

  • खरीद लागत नहीं
  • रखरखाव नहीं
  • ब्याज या लोन का दबाव नहीं

इन सबका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ता है।
कम लागत में खेती होने से शुद्ध मुनाफा बढ़ता है, जो हर किसान का लक्ष्य होता है।

क्या मशीन किराये पर लेने के कोई नुकसान भी हैं?

ईमानदारी से देखें तो कुछ सीमाएं भी हैं:

  • सीजन में मशीन की उपलब्धता
  • किराया क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग
  • मशीन की स्थिति पर निर्भरता

लेकिन सही प्लानिंग और भरोसेमंद स्रोत से मशीन लेने पर ये समस्याएं काफी हद तक कम हो जाती हैं।

किन किसानों को मशीन किराये पर जरूर लेनी चाहिए?

मशीन किराये पर लेना खासतौर पर इन किसानों के लिए फायदेमंद है:

  • छोटे और सीमांत किसान
  • वे किसान जो कई तरह की फसल उगाते हैं
  • नए किसान जो कम जोखिम चाहते हैं
  • वे किसान जो साल में सीमित समय मशीन का उपयोग करते हैं

निष्कर्ष

निष्कर्ष के तौर पर कहा जाए तो खेती की मशीन किराये पर लेना आज के समय में किसानों के लिए एक व्यावहारिक और लाभदायक विकल्प बन चुका है। यह तरीका किसानों को भारी निवेश से बचाता है, खेती की लागत कम करता है और समय पर काम पूरा करने में मदद करता है। खासकर छोटे और मध्यम किसानों के लिए यह आधुनिक खेती से जुड़ने का आसान रास्ता है, जहां बिना मशीन खरीदे नई तकनीक का लाभ लिया जा सकता है। सही योजना और भरोसेमंद स्रोत से मशीन किराये पर लेकर किसान अपनी उत्पादकता बढ़ा सकता है और खेती को ज्यादा टिकाऊ व मुनाफेदार बना सकता है।

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Frequently Asked Questions About क्या खेती की मशीन किराये पर लेना फायदेमंद है? जानिए 7 बड़े लाभ

हाँ, छोटे और सीमांत किसानों के लिए मशीन किराये पर लेना सबसे बेहतर विकल्प है, क्योंकि उन्हें मशीन खरीदने में भारी पैसा नहीं लगाना पड़ता और जरूरत के समय ही खर्च करना होता है।

मशीन का किराया मशीन के प्रकार, उपयोग के समय और क्षेत्र पर निर्भर करता है। आमतौर पर ट्रैक्टर और कृषि उपकरण घंटे या दिन के हिसाब से किराये पर मिल जाते हैं।

अगर मशीन किसी विश्वसनीय कस्टम हायरिंग सेंटर या अनुभवी मशीन मालिक से ली जाए, तो किराये की मशीनें पूरी तरह भरोसेमंद होती हैं और सही तरीके से काम करती हैं।

हाँ, क्योंकि इससे खरीद, रखरखाव और मरम्मत का खर्च नहीं आता, जिससे कुल लागत कम होती है और खेती से मिलने वाला शुद्ध मुनाफा बढ़ता है।

अधिकतर जगहों पर ट्रैक्टर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, सीड ड्रिल, स्प्रेयर और हार्वेस्टर जैसी मशीनें किराये पर उपलब्ध होती हैं, हालांकि उपलब्धता क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

मशीन की हालत, किराया, ईंधन की जिम्मेदारी, समय सीमा और मशीन मालिक की विश्वसनीयता जरूर जांचनी चाहिए, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।

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