प्लास्टिकलचर साबित होगा फायदेमंद - जानें इसके 3 फायदे
कृषि में उपज को बढ़ाने के लिए आए दिन नई नई तकनीकी लाई जा रही हैं । जिनमें से एक लाभदायक तकनीक है प्लास्टिकल्चर ! प्लास्टिकल्चर कृषि उत्पादन बढ़ाने की नई विधि है । इसके द्वारा कृषि में उपज को बढ़ाने के लिए प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है । न केवल प्लास्टिकल्चर सस्ती एवं लाभदायक कृषि पद्धति है। बल्कि यह जैविक खेती को भी बढ़ावा देती है । भारत में विशेषकर कपास, मिर्च, शहतूत आदि की खेती में प्लास्टिकल्चर को कृषकों द्वारा अपनाया गया है । वही देखा जाए तो यह तकनीक सब्जियों, अनाज, केले, कपास आदि की फसलों के लिए भी उपयुक्त होती है ।
कम पानी में भी खेती मुमकिन
प्लास्टिकल्चर के विभिन्न नामों में से एक है ड्रिप इरिगेशन और प्लास्टिक मल्चिंग । जिससे बहुत कम पानी वाले इलाकों में भी आसानी से फसल उत्पादन किया जा सकता है । बल्कि इस विधि से पौधे तेजी से बढ़ते हैं । प्लास्टिकल्चर में मल्चिंग से मिट्टी में ज्यादा समय तक नमी रहती है । प्लास्टिकल्चर में पानी का उपयोग 40% तक कम किया जा सकता है साथ में बिजली की बचत भी होती ।
फर्टिलाइजर का उपयोग होता है कम
मल्चिंग, ग्रीन हाउस आदि तरीकों से फ़र्टिलाइज़र का उपयोग 40% तक कम किया जा सकता है । खास बात है प्लास्टिकल्चर खरपतवार को भी कम करता है । इसके अलावा यह पौधों में लगने वाले कीड़ों को पनपने से भी रोकता है । ज्यादा तापमान होने पर हानिकारक कीटाणु कम होते हैं और साथ ही कीटनाशक का उपयोग भी कम होता है ।
कम लागत
अन्य तकनीकों के मुकाबले यह तकनीक काफी सस्ती एवं किफायती है ड्रिप इरिगेशन पर 60 हजार प्रति हेक्टेयर और मल्चिंग पर 32000 प्रति हेक्टेयर तक की लागत आती है जिस पर सरकार द्वारा प्लास्टिकल्चर अपनाने पर ड्रिप इरिगेशन पर 60% एवं मल्चिंग पर 50% सब्सिडी दी जाती है परंतु यदि इसका फायदा देखे तो किसानों को प्रति हेक्टेयर 40000 से 50 हजार तक का फायदा मिलता है
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