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अब समय आ गया है रबी की फसल, सरसों की बुवाई का

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फसल में कीट और रोगों पर निंयत्रण पर जो जानकारी हमने उपलब्ध कराई है उसकी पुष्टि कृषि विभाग या जिस संस्था से रसायन खरीद रहे हो वहां से जरूर करें।

सरसों की फसल रबी में उगाई जाने वाली मुख्य फसल तिलहन है। सरसों की खेती सीमित सिचाई में भी अधिक लाभदायक फसल है। सरसों की फसल की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए कई हाइब्रिड बीजों का प्रयोग कर सकते है। सरसों की फसल के लिये 20-25 डिग्री सेंट्रिग्रेट तापमान होना चाहिए। सरसो की सबसे ज्यादा उपज के लिए सबसे उत्तम मिट्टी दोमट भूमि (मिटटी) है। जिसमे पानी का निकास होना बहुत जरुरी है।

भूमि को तैयार कैसे करे?
सरसो की खेती के लिए, खेती की तैयारी सबसे पहले (मई या जून में) करनी चाहिए। पहले मिट्टी पलटने वाले हल या एम्.बी. प्लाऊ से जुताई करनी चाहिए। इसके बाद बारिश का मौसम ख़त्म होने के बाद दो से तीन बार जुताई करें| जुताई के लिए देसी हल या कल्टीवेटर का प्रयोग करें । फिर पटा (पटेलना) लगाकर मिट्टी को समतल और बारीक (ज्यादा मिट्टी के डिल्ले नहीं होना चाहिए) करना चाहिए।

बीज दर
सिंचित क्षेत्र में सरसो की फसल की बुवाई के लिए 2.5 से 3 kg बीज प्रति एकड़ के दर से प्रयोग करना चाहिए । अगर खेत में नमी की मात्रा कम है, तो सल्फर का प्रयोग करें जिससे खेत में नमी बनी रहेगी।

बुवाई का सही समय
हर वर्ष की तुलना में इस साल बारिश की वजह से अभी लगभग सरसों की बुवाई शुरु नहीं हुई है। और वैसे तो बुवाई का सही समय सितम्बर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के पहले सप्ताह तक बहुत अच्छा माना जाता है। सरसों की बुवाई खेत की नमी के हिसाब से 9 या 7 पैरों वाले हल की मशीन से करनी चाहिए । अगर नमी है तो 9 पैरों वाली हल से कर सकते है और साथ ही मिट्टी बारीक होना चाहिए। सरसो की बीज की गहराई 5 से 6 सेंटीमीटर होना चाहिए।

खाद और उर्वरक का प्रयोग कैसे करें ?
बेहतर परिणाम के लिए पहले खेत की मिट्टी का परीक्षण करवा ले, ज्यादा अच्छा रहेगा । यदि भूमि परीक्षण के उपरांत मिट्टी में यदि गंधक तत्व की कमी पायी जाती है, तो वहाँ पर जिंक सल्फेट लगभग 8 से 10 कि.ग्रा प्रति एकड़ की दर से मिट्टी में मिला दें, जिसकी वजह से लगभग तीन साल तक गंधक का लेवल बराबर रहेगा। सरसों की खेती की अंतिम जुताई से पहले देशी खाद (गोबर गला हुआ) लगभग २५-30 कुन्टल प्रति एकड़ प्रयोग करते है, तो फसलों की पैदावार अन्य कृतिम उर्वरकों से उत्तम गुणवत्ता वाली होती है। सिंचित भूमि में लगभग 30 किलोग्राम नाइट्रोजन, लगभग 30 किलोग्राम फास्फोरस तथा लगभग 30 किलोग्राम पोटास तत्व के रूप में प्रति एकड़ बुवाई से पहले प्रयोग करते है। बुवाई के 25-30 दिन बाद 20 से 25 किलोग्राम नाइट्रोजन की मात्रा छिड़काव रूप में प्रयोग करना चाहिए । इससे फूल और फली का विस्तार बहुत तेजी से और गुणवत्ता से होता है।

फसल में कीट और रोगों पर नियंत्रण कैसे करें ?
सरसो के कुछ प्रमुख रोग जैसे पत्ती झुलसना, सफ़ेद किट्ट रोग आदि इन रोगो पर नियंत्रण पाने लिए मेन्कोजेब 75 प्रतिशत नामक रसायन पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए । सरसो में कीट कई प्रकार के होते है, जैसे आरा मक्खी यह काले रंग की घरेलु मक्खी से छोटी होती है । यह पत्तियों के किनारे पर छेद बनाते हुए, बहुत तेजी से खाती है। इसे रोकने के लिए मैलाथियान 50 ई.सी. छिड़काव करना चाहिए। माहू की सबसे बड़ी समस्या है, पौधों के कोमल तनों, पत्तियों, फूल एवं नयी फलियों के रस चूसते हैं। इस कीट का प्रकोप दिसंबर से मार्च तक रहता है। इसके नियंत्रण के लिए डाईमेथोएट छिड़काव करना अति आवश्यक है।
(इसका प्रयोग करने से पहले कृषि विभाग से या जिस केंद्र से यह रसायन ख़रीद रहें हों पूछताछ जरूर करें )

अपनी अमूल्य सलाह के लिए हमें सब्सक्राइब करें यदि कोई त्रुटि हो तो हमें सूचित करें। नए आने वाले लेख में हम फसल की कटाई कब और किस समय करना चाहिए और इसे अपने घरो में कैसे सुरक्षित रखें इसके बारे में बातएंगे।

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