बजट 2026 में कृषि क्षेत्र से क्या उम्मीदें हैं?
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Budget 2026: देश का कृषि क्षेत्र एक बार फिर बजट से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठा है। फरवरी में जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगी, तब किसानों की नजर इस बात पर होगी कि सरकार उनकी आमदनी बढ़ाने और खेती की रफ्तार सुधारने के लिए क्या कदम उठाती है।
खेती आज भी करोड़ों लोगों की रोज़ी-रोटी है, लेकिन बीते कुछ समय से यह क्षेत्र दबाव में है। बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और कम ग्रोथ को देखते हुए बजट 2026 में कृषि, इनकम और बाजार से जुड़े मुद्दों पर खास ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।
अर्थव्यवस्था की रीढ़, लेकिन कम उत्पादकता की चुनौती
कृषि आज भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है। लगभग 46 प्रतिशत लोगों को कृषि क्षेत्र से रोजगार मिलता है, लेकिन ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में इसका योगदान केवल 18-20 प्रतिशत के बीच है। यह साफ तौर पर कृषि क्षेत्र में कम उत्पादकता की ओर इशारा करता है।
किसानों की आय महंगाई दर के मुकाबले धीमी गति से बढ़ रही है। इसके साथ ही जलवायु जोखिम भी लगातार बढ़ रहे हैं। 2026 में अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए कृषि क्षेत्र एक बार फिर यूनियन बजट को उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है।
फिस्कल ट्रांसफर नहीं, अब संरचनात्मक सुधारों की जरूरत
सरकार PM-KISAN योजना के तहत किसान परिवारों को सालाना ₹6,000 की आर्थिक सहायता देती है, लेकिन यह राशि कई वर्षों से नहीं बढ़ाई गई है। चर्चा है कि बजट 2026 में इस राशि को ₹6,000 से बढ़ाया जा सकता है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नकद सहायता (Fiscal Transfer) से किसानों की आय में स्थायी सुधार संभव नहीं है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए अब संरचनात्मक सुधार (Structural Reforms) जरूरी हैं। इसमें सबसे अहम भूमिका कृषि निर्यात की हो सकती है। बेहतर प्राइस रियलाइजेशन और स्थिर निर्यात नीति से न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि भारत की पहचान एक ग्लोबल फूड हब के रूप में भी मजबूत होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से हर साल भारी नुकसान
भारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद हर साल कुल उत्पादन का करीब 10–15 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो जाता है। इससे सालाना लगभग ₹1.5 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है। हर साल बड़ी मात्रा में फसल सिर्फ इसलिए खराब हो जाती है क्योंकि उसे सुरक्षित रखने की सही सुविधा नहीं होती।
इसका मुख्य कारण है:
- कोल्ड स्टोरेज की कमी
- क्लाइमेट कंट्रोल्ड वेयरहाउस का अभाव
- खराब लॉजिस्टिक्स
- आधुनिक तकनीक का सीमित उपयोग
किसानों की मांग है कि बजट 2026 में गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाए। इससे किसान अपनी उपज को कुछ समय तक सुरक्षित रख सकेंगे और सही समय पर बेहतर दाम मिलने पर फसल बेच पाएंगे। इससे मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचने की स्थिति भी कम होगी।
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बजट 2026 में किन क्षेत्रों पर सरकार से सबसे ज्यादा उम्मीदें
बजट 2026 में केवल पीएम-किसान सम्मान निधि तक ही सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। किसानों और विशेषज्ञों को भरोसा है कि सरकार इस बार Kisan Credit Card (KCC) की कर्ज सीमा बढ़ाने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से जुड़ी नई नीतियां लाने और कृषि क्षेत्र के कुल बजट को ₹1.37 लाख करोड़ से बढ़ाकर करीब ₹1.5 लाख करोड़ करने पर विचार कर सकती है।
किसानों की नजर ऐसे कदमों पर है, जो सीधे उनकी आमदनी और खर्च दोनों पर असर डालें।
बढ़ा है कृषि बजट, लेकिन ग्रोथ का अंतर बना हुआ है
2013 से अब तक कृषि और किसान कल्याण से जुड़ा बजट लगभग छह गुना बढ़ा है। वित्त वर्ष 2013-14 में यह ₹21,933 करोड़ था, जो 2025-26 में बढ़कर करीब ₹1.27 लाख करोड़ हो गया है।
इसके बावजूद GDP ग्रोथ (7.4%) और कृषि क्षेत्र की ग्रोथ (3.1%) के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। इससे साफ है कि बजट बढ़ाने के साथ-साथ उसके प्रभावी उपयोग पर भी ध्यान देना जरूरी है।
स्वदेशी बीज, MSP विस्तार और KVK की भूमिका
किसानों की एक बड़ी मांग स्वदेशी बीजों को बढ़ावा देने की है। आयातित बीज महंगे होते हैं और हर क्षेत्र के लिए उपयुक्त भी नहीं होते। स्वदेशी बीजों पर निवेश बढ़ने से खेती की लागत कम हो सकती है और पैदावार भी बेहतर हो सकती है।
इसके साथ ही किसान चाहते हैं कि MSP का दायरा मौजूदा 23 फसलों से आगे बढ़े और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) ज़मीनी स्तर पर किसानों को सही जानकारी और बाजार से जोड़ने में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाएं।
फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की स्पष्ट नीति
किसान चाहते हैं कि सरकार गेहूं और धान की खेती के अलावा दालें, तिलहन, मोटे अनाज, सब्जियां और फलों पर भी बराबर ध्यान दे। इससे पानी की बचत होगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी और किसानों को आमदनी के नए विकल्प मिलेंगे।
बजट 2026 से उम्मीद है कि सरकार फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहन और बाजार सुविधा दोनों उपलब्ध कराएगी।
उर्वरक, यूरिया और कृषि मशीनरी पर राहत की उम्मीद
खेती में सबसे बड़ा खर्च उर्वरक, यूरिया, बीज और मशीनों पर आता है। किसान चाहते हैं कि बजट 2026 में उर्वरक और यूरिया पर सब्सिडी बनी रहे या बढ़ाई जाए।
साथ ही छोटे और सीमांत किसानों के लिए छोटी कृषि मशीनों और औजारों पर ज्यादा सब्सिडी मिलने की भी उम्मीद है, ताकि वे भी मशीनीकरण का लाभ उठा सकें।
FPO से जुड़ी कागजी प्रक्रियाओं में सुधार की उम्मीद
किसान उत्पादक संगठन (FPO) किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं, लेकिन लंबी और जटिल कागजी प्रक्रिया कई किसानों के लिए परेशानी बन जाती है।
बजट 2026 से उम्मीद है कि सरकार FPO से जुड़ी प्रक्रिया को सरल और आसान बनाएगी, ताकि ज्यादा किसान इससे जुड़ सकें।
बजट 2026 में कृषि ऋण पर खास फोकस रहने की उम्मीद है
किसान चाहते हैं कि KCC और कृषि ऋण आसानी से और समय पर मिलें। बजट में कर्ज प्रक्रिया को सरल बनाने, डिजिटल व्यवस्था मजबूत करने और छोटे किसानों को प्राथमिकता देने की उम्मीद है। महिला किसानों के लिए भी ऋण तक आसान पहुंच पर ध्यान दिया जा सकता है।
जलवायु अनुकूल खेती पर अधिक सार्वजनिक निवेश की उम्मीद
मौसम की अनिश्चितता अब खेती की सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। किसान चाहते हैं कि सरकार सूखा-रोधी बीज, कम पानी वाली खेती, माइक्रो सिंचाई और सोलर पंप जैसी योजनाओं पर ज्यादा खर्च करे। इसके साथ ही फसल बीमा योजनाओं को भी बेहतर और पारदर्शी बनाने की उम्मीद है।
कीटनाशकों पर अनुसंधान एवं विकास व्यय बढ़ाने और जीएसटी में राहत मिलने की उम्मीद
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कीटनाशकों और कृषि अनुसंधान पर खर्च बढ़ाना जरूरी है। किसान चाहते हैं कि कीटनाशकों पर जीएसटी कम हो और इन्हें जरूरी इनपुट माना जाए, ताकि लागत कम हो सके।
बजट 2026 पर उद्योग विशेषज्ञों की राय
डॉ. रघुपति सिंघानिया, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, JK Tyre & Industries Ltd. का मानना है कि केंद्रीय बजट 2026 में Ease of Doing Business पर फिर से मजबूत फोकस होना चाहिए। खासकर तेज़ मंजूरी प्रक्रिया और सरल नियमों से निजी निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
उनके अनुसार बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स भारत की लागत प्रतिस्पर्धा और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करेंगे। बदलते वैश्विक व्यापार माहौल में निर्यात को समर्थन देने और भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ने वाली नीतियां अहम होंगी। ऑटोमोबाइल और टायर सेक्टर के लिए ऐसी नीतिगत निरंतरता जरूरी है जो उत्पादों की वहन क्षमता बढ़ाए और ग्रामीण आय को सहारा दे, जिससे मांग बनी रहे और अर्थव्यवस्था में सकारात्मक असर पड़े।
श्री नरेंद्र मित्तल, प्रेसिडेंट एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, CNH India का कहना है कि चूंकि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसलिए बजट 2026 ग्रामीण विकास को तेज़ करने का बड़ा अवसर है। वे मानते हैं कि खेती में मशीनीकरण बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और उत्पादकता सुधारने के लिए लक्षित नीतिगत कदम जरूरी हैं।
उन्होंने फसल समाधान उपकरणों और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी, साथ ही छोटे और सीमांत किसानों के लिए आसान और सस्ता फाइनेंस उपलब्ध कराने की उम्मीद जताई है। उनके अनुसार उद्योग और सरकार के मिलकर किए गए प्रयास खेती को मैन्युअल तरीकों से निकालकर अधिक कुशल और टिकाऊ दिशा में ले जा सकते हैं, जिससे किसानों की आय और कृषि व्यवस्था दोनों मजबूत होंगी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, बजट 2026 से कृषि क्षेत्र की उम्मीदें बहुत स्पष्ट हैं। किसान केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीन पर असर दिखाने वाले फैसले चाहते हैं। अगर सरकार संरचनात्मक सुधार, जलवायु अनुकूल खेती, कृषि ऋण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर संतुलित ध्यान देती है, तो यह बजट भारतीय कृषि के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
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