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क्या भविष्य में डीजल और पेट्रोल पर नहीं चलेंगे ट्रैक्टर?

    क्या  भविष्य में डीजल और पेट्रोल पर नहीं चलेंगे ट्रैक्टर?

ट्रैक्टर की जरूरत कृषि में क्यों होती है?

ट्रैक्टर की जरूरत कृषि में क्यों होती है? आज हर किसान जानता है ट्रैक्टर में डीज़ल की कितनी जरूरत होती है, डीज़ल में लिए कितना खर्चा होता है ये भी किसान जानता है। हर किसान चाहेगा कि उसका ट्रैक्टर बिना डीज़ल के चलें पर अभी ये बात किसानों सपने से कम नहीं लगेगी, लेकिन वो वक्त भी अब दूर नहीं जब ये सपना साकार हो जाएगा। आज ट्रैक्टर निर्माताओं और वैज्ञानिकों में होड़ चली है कि कैसे बिना डीज़ल के चलने वाला ट्रैक्टर इंजन बनाया जाए, इससे ना केवल किसानों को फायदा होगा पर साथ में यह प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की दृष्टि से भी एक क्रांतिकारी कदम होगा। तो आइए जानते है अभी इस तरह के इंजन को बनाने का काम भारत में कहा कहा चल रहा है और किस स्तर तक पहुंचा है?

 

●     भविष्य में बिना डीज़ल के चलने वाले ट्रैक्टर इंजन विकसित करने हेतु प्रतिष्ठित ट्रैक्टर निर्माता कंपनी ‘ट्रैक्टर और फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड’ (TAFE) ने इसी वर्ष भारत के ही श्रेष्ठ शिक्षा संस्थान आईआईटी कानपुर के साथ गठजोढ़ किया है। टेफे और आईआईटी कानपुर मिलकर ट्रैक्टर इंजनों के लिए एक ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित करेंगे जो डीजल और पेट्रोल जैसे ईंधन की जगह डीआई मिथाइल ईथर  (DME) पर चलेंगे। डीएमई वाले ट्रैक्टर इंजन का विकास दुनिया महत्वपूर्ण है क्योंकि पर्यावरण के संरक्षण के लिए दुनियाभर में शोध चल रहे हैं, डीएमई जैसा हरे रंग का ईंधन पर्यावरण संरक्षण में स्थायी विकास प्राप्त करने में मदद कर सकता है। डीएमई, एक गैर विशेला और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन है।

 

●     इसके पूर्व इसी वर्ष में देश का पहला इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर सामने आया, यह 6 एचपी एक छोटा ट्रैक्टर है पर इसे भी डीज़ल फ्री होने की तरफ एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। हैदराबाद स्थित स्टार्ट-अप सेलेस्ट्रियल ई-मोबिलिटी (Cellestial E-Mobility) ने इसका अनावरण किया है, यह ट्रैक्टर एक घंटे में 150 रुपए डीज़ल की तुलना में करीब 25-30 रुपए की बिजली की खपत करता है।

 

भारत के बाहर विदेशों में भी ऐसी तकनीको पर लगातार काम चल रहा है जिनसे बिना डीज़ल के चलने वाले ट्रैक्टर बनाए सकें, कुछ कंपनियों ने तो इस तरह के इंजन विकसित भी कर लिए है पर वे ट्रैक्टर अभी भारत के किसानों के लिए उपयुक्त नहीं है। अब आगे चाहे ट्रैक्टर में डीजल की जगह डीएमई जैसे दूसरे किसी ईंधन का इस्तेमाल हो या बिजली से चार्ज होकर चलने वाले ट्रैक्टर बने पर ये तो तय है कि जल्दी से जल्दी बाज़ार में किसानों के लिए डीजल के बिना चलने वाले ट्रैक्टरों के विकल्प आ जाएंगे।

 

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