LED लाइट से खेती! कैसे किसान कंट्रोल कर रहे हैं फूलों के खिलने का समय
टेबल ऑफ कंटेंट
तमिलनाडु के होसुर और कृष्णागिरी बेल्ट से आई यह खबर किसी जादुई फिल्म के सीन जैसी लगती है, जहां रात के अंधेरे में खेत जगमगाते बल्बों से सजे होते हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यह कोई सजावट नहीं, बल्कि 'स्मार्ट खेती' का एक जबरदस्त नमूना है। चलिए समझते हैं कि आखिर तमिलनाडु के किसान रात भर ये बल्ब जलाकर क्या जादू कर रहे हैं।
क्या है यह अनोखा प्रयोग: (फोटोपीरियड कंट्रोल)
तमिलनाडु के किसानों द्वारा प्रयोग हो रही इस तकनीक को वैज्ञानिक भाषा में 'फोटोपीरियड कंट्रोल' (Photoperiod Control) कहा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो किसान आर्टिफिशियल रोशनी का इस्तेमाल करके पौधों के 'सोने और जागने' के साइकिल को नियंत्रित कर रहे हैं।
आमतौर पर गुलाब, जरबेरा और गुलदाउदी (Chrysanthemum) जैसे पौधों को फूल देने के लिए लंबे समय तक अंधेरे की जरूरत होती है। किसान रात के समय एलईडी बल्ब जलाकर उन पौधों के इस 'नाइट साइकिल' को तोड़ देते हैं। इससे पौधा यह समझता है कि अभी दिन खत्म नहीं हुआ है, और वह फूल देने के बजाय अपनी 'ग्रोथ स्टेज' में ही रहता है।
किसान फूलों को खिलने से क्यों रोक रहे हैं?
अब सवाल उठता है कि भला कोई किसान अपने ही फूलों की फसल को खिलने से क्यों रोकेगा? इसके पीछे एक बहुत ही स्मार्ट बिजनेस माइंडसेट है:
- मार्केट डिमांड और सही दाम: किसान चाहते हैं कि इन पौधों के फूल तब खिलें जब बाजार में उनकी मांग सबसे ज्यादा हो (जैसे शादी का सीजन)। इस तकनीक से वे फूलों की पैदावार को कुछ हफ़्तों के लिए आगे बढ़ा देते हैं ताकि उन्हें फसल का सबसे अच्छा भाव मिल सके।
- गुणवत्ता में सुधार: जब पौधा लंबे समय तक ग्रोथ स्टेज में रहता है, तो उसका तना मजबूत होता है और बाद में आने वाले फूलों की क्वालिटी और चमक भी काफी बढ़ जाती है।
- कीटों से बचाव: रात की यह हल्की रोशनी कई तरह के कीड़ों को भ्रमित करती है, जिससे फसलपर कीड़ों का हमला कम हो जाता है।
ग्लोबल तकनीक, देसी अंदाज़
यह तकनीक नीदरलैंड, जापान और अमेरिका जैसे देशों में ग्रीनहाउस के अंदर सालों से इस्तेमाल हो रही है। लेकिन होसुर बेल्ट के करीब 500 एकड़ क्षेत्र में किसान बिना किसी सरकारी मदद के, खुले खेतों में इसका सफल प्रयोग कर रहे हैं। रात के समय जब आप बेंगलुरु की ओर उड़ान भरते हैं, तो आसमान से ये खेत तारों की जमीन जैसे दिखाई देते हैं।
अंतिम विचार: खेती में विज्ञान का तड़का
भारतीय किसानों का यह प्रयोग साबित करता है कि वे अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर तकनीक को गले लगा रहे हैं। कम बिजली खपत वाले एलईडी बल्बों ने इस महंगी ग्लोबल तकनीक को अब छोटे किसानों की पहुंच में भी ला दिया है।
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