किसानों को बड़ी राहत: खाद की कीमतें नहीं बढ़ेंगी
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खेती-किसानी में खाद का क्या महत्व है, यह हम सब जानते हैं। लेकिन हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट में जो तनाव चल रहा है, उसने दुनिया भर के बाजारों में खलबली मचा दी है। ऐसे में हमारे किसान भाईयों के मन में एक ही डर था, क्या अब खाद के दाम भी आसमान छुएंगे? लेकिन फिक्र मत कीजिए, हाल ही में सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों की जेब पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा।
सरकार का बड़ा वादा: पुराना दाम, नई सब्सिडी
फाइनेंस मिनिस्टर श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने हाल ही में मुंबई के एक कार्यक्रम में इस ओर बड़ा संकेत दिया। उन्होंने याद दिलाया कि जैसे हमने कोविड के मुश्किल समय में खाद की बढ़ती कीमतों को किसानों तक नहीं पहुंचने दिया था, वैसे ही अब भी सरकार सब्सिडी बढ़ाकर खाद के दाम स्टेबल रखेगी। यानी भले ही विदेश में खाद महंगी हो रही है, सरकार उसे महंगी खरीद रही है, लेकिन आपको वह पुराने सस्ते रेट पर ही मिलेगी।
यूरिया और डीएपी के वैश्विक दाम बढ़े
दुनिया भर में खाद की कीमतें डराने वाली हैं। मार्च से अब तक यूरिया के दाम लगभग 85% बढ़कर 850 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गए हैं। वहीं डीएपी (DAP) की कीमतों में भी 25 से 50% की तेजी आई है। भारत अपनी जरूरत का 20 से 30 प्रतिशत और डीएपी आयात का 30 प्रतिशत हिस्सा गल्फ (खाड़ी) देशों से मंगवाता है, इसलिए वहां की जंग का सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है।
लेकिन सरकार ने खरीफ 2026 के लिए सब्सिडी दरों में 10 से 21% तक की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है, जिस पर लगभग 41,534 करोड़ रुपये खर्च होंगे। भले ही घरेलू उत्पादन में थोड़ी गिरावट देखी गई है, लेकिन बाजार के जानकारों का कहना है कि फिलहाल भारत के पास खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार का लक्ष्य है कि खाद की सप्लाई में कोई रुकावट न आए।
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किसान खुशहाल, तो देश खुशहाल
अंत में, इस पूरी खबर का सार यही है कि भले ही दुनिया में जंग छिड़ी हो, भारत का किसान सुरक्षित है। खाद के दाम नहीं बढ़ेंगे और खरीफ की फसल के लिए आपको सही कीमत पर यूरिया और डीएपी मिलता रहेगा। खेती जारी रखें और देश के भंडार भरते रहें!
ट्रैक्टर ज्ञान की राय
ट्रैक्टर ज्ञान का मानना है कि सरकार का यह कदम किसानों के लिए किसी "संजीवनी" से कम नहीं है। डीजल और अन्य इनपुट्स की बढ़ती लागत के बीच अगर खाद के दाम भी बढ़ जाते, तो किसानों का मुनाफा पूरी तरह खत्म हो जाता। सरकार ने सही समय पर सब्सिडी बढ़ाकर खेती को घाटे से बचा लिया है। हम किसानों को सलाह देते हैं कि खाद की कालाबाजारी या अफवाहों से बचें, क्योंकि सरकार ने पर्याप्त फंड और स्टॉक का इंतजाम कर लिया है।
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