केंद्र सरकार ने बढ़ाई गन्ना किसानों के लिए FRP, जानिए कैसे मिलेगा फायदा
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गन्ने की खेती करने वाले किसान भाईयों के लिए यह खबर सच में राहत लेकर आई है। बढ़ती लागत, महंगा डीजल और खेती के खर्चों के बीच सरकार ने गन्ने के दाम में बढ़ोतरी करके किसानों को बड़ी राहत दी है।
सरकार ने गन्ने की कीमतों (FRP - Fair and Remunerative Price) में जो बढ़ोतरी की है, उसका सीधा असर करोड़ों किसानों की जेब और उनके भविष्य पर पड़ने वाला है। आइए समझते हैं कि यह फैसला किसानों के लिए कितना मायने रखता है।
अब गन्ने की फसल देगी ज्यादा फायदा
सरकार द्वारा तय किया गया नया FRP करीब 10% ज्यादा माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद इसकी जानकारी दी। पिछले कुछ सालों में खेती की लागत लगातार बढ़ी है। खाद, बीज, मजदूरी और डीजल के खर्च ने किसानों की कमर तोड़ दी थी। ऐसे समय में ₹365 प्रति क्विंटल का नया रेट किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला सकता है।
यह रेट 10.25% बेसिक रिकवरी पर लागू होगा। पिछले सीजन के ₹355 प्रति क्विंटल के मुकाबले इसमें 2.81% की बढ़ोतरी हुई है। इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा उन करीब 1 करोड़ किसानों को मिलेगा जो अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह गन्ने की फसल पर निर्भर हैं।
ज्यादा रिकवरी पर बढ़ेगा और भाव
सरकार के अनुसार अगर चीनी मिलों की रिकवरी 10.25% से ज्यादा होती है, तो हर 0.1% बढ़ोतरी पर किसानों को ₹3.56 प्रति क्विंटल अतिरिक्त मिलेगा। वहीं 9.5% से कम रिकवरी वाले क्षेत्रों में भी किसानों के भाव में कटौती नहीं होगी और उन्हें ₹338.30 प्रति क्विंटल का भुगतान मिलेगा। सरकार के मुताबिक गन्ने की अनुमानित उत्पादन लागत करीब ₹182 प्रति क्विंटल है, जबकि नया FRP इससे लगभग 100.5% ज्यादा तय किया गया है।
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क्या है यह FRP और किसानों को इससे क्या उम्मीद है?
FRP वह न्यूनतम मूल्य है जो चीनी (शुगर) मिलों को किसानों को देना ही पड़ता है। सरकार हर साल लागत और बाजार की स्थिति को देखते हुए इसे तय करती है। इस बार की बढ़ोतरी दर्शाती है कि सरकार कृषि क्षेत्र, खासकर नकदी फसलों (कैश क्रॉप्स) को बढ़ावा देना चाहती है।
जानकारों का मानना है कि इस फैसले से न केवल किसानों की इनकम बढ़ेगी, बल्कि रूरल इकॉनमी में भी नई जान आएगी। जब किसान के हाथ में पैसा होगा, तो वह खेती की नई टेक्नोलॉजीसऔर बेहतर इम्प्लीमेंट्स में इन्वेस्ट कर पाएगा। सरकार का यह भी कहना है कि अतिरिक्त गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में भी बढ़ेगा।
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