सेकेंड-हैंड ट्रैक्टर इम्प्लीमेंट खरीदने से पहले ये 12 चीजें जरूर चेक करें

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By Khushbu RajputMay 05, 2026 06:59 PM

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खेती में ट्रैक्टर जितना जरूरी है, उससे कहीं ज्यादा काम उसके पीछे लगने वाले इम्प्लीमेंट्स करते हैं। रोटावेटर हो, कल्टीवेटर हो या डिस्क हैरो, असली मेहनत यही मशीनें करती हैं। पर इन नए इम्प्लीमेंट्स की कीमत हर साल बढ़ती जा रही है। 

ऐसे में कई किसान समझदारी दिखाते हैं और सेकेंड-हैंड ट्रैक्टर इम्प्लीमेंट लेने का फैसला करते हैं। इससे उनके पैसे भी बचते हैं और काम भी हो जाता है। लेकिन बिना जांचे-परखे पुराना सामान खरीदना कभी-कभी सस्ता नहीं, उल्टा महंगा पड़ जाता है। इसलिए खरीदने से पहले थोड़ी समझदारी जरूरी है।

सेकेंड-हैंड ट्रैक्टर इम्प्लीमेंट क्या होते हैं? 

सेकेंड-हैंड ट्रैक्टर इम्प्लीमेंट वो कृषि उपकरण होते हैं जिन्हें पहले कोई और किसान इस्तेमाल कर चुका हो और अब बेच रहा हो। इसमें रोटावेटर, प्लाउ (हल), कल्टीवेटर, सीड ड्रिल, थ्रेशर जैसे कई उपकरण आते हैं। ये आपको या तो किसी डीलर के पास मिलेंगे या आप सीधे किसान से भी इन्हें खरीद सकते हैं।

सेकेंड-हैंड इम्प्लीमेंट खरीदना क्यों फायदेमंद है? 

इसका सबसे बड़ा फायदा है कम कीमत। एक पुराना इम्प्लीमेंट आपको नई कीमत के मुकाबले 30% से 60% तक सस्ते में मिल सकता है। इससे छोटे किसानों पर कर्ज का बोझ कम होता है। साथ ही, अगर आप किसी खास फसल के लिए थोड़े समय के लिए कोई मशीन चाहते हैं, तो पुरानी मशीन लेना एक स्मार्ट बिजनेस डिसीजन है।

सेकेंड-हैंड ट्रैक्टर इम्प्लीमेंट खरीदने से पहले 12 जरूरी बातें 

जब भी आप कोई सेकंड-हैंड ट्रैक्टर इम्प्लीमेंट खरीदने जाएं, तो जल्दबाजी बिल्कुल न करें। एक-एक चीज ध्यान से देखें:

  • चेक करें कि इम्प्लीमेंट में कहीं से तेल तो नहीं टपक रहा।
  • मशीन का मुख्य ढांचा सीधा होना चाहिए, मुड़ा हुआ नहीं।
  • इम्प्लीमेंट के स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता ज़रूर चेक करें।  
  • देखें कि क्या सभी नट-बोल्ट असली हैं या कुछ देसी जुगाड़ किया गया है।
  • कभी-कभी जंग छुपाने के लिए नया पेंट कर दिया जाता है, सावधानी से देखें।
  • मशीन के मालिक से पूछें कि मशीन का इस्तेमाल किस काम में और कितनी बार हुआ है।
  • चेक करें कि कहीं मशीन पहले टूटी तो नहीं थी और उस पर कच्ची वेल्डिंग तो नहीं की गई है।
  • देखें कि लोहे पर कितनी जंग लगी है। हल्की जंग ठीक है, लेकिन अगर लोहा गल गया है, तो उसे न लें।
  • रोटावेटर जैसे मशीनों में गियरबॉक्स चलाकर देखें। अगर अजीब आवाज आ रही है, तो अंदर के गियर खराब हो सकते हैं।
  • रोटावेटर या कल्टीवेटर में देखें कि ब्लेड कितने घिसे हैं। ज्यादा घिसे ब्लेड का मतलब है आपको तुरंत नया खर्चा करना होगा।
  • मशीन कितनी पुरानी है, इसका पता जरूर लगाएं। खरीदने से पहले इम्प्लीमेंट का मॉडल और उसके बनने के साल का पता करें। 
  • सबसे जरूरी बात ट्रायल लेना, जिस इम्प्लीमेंट को खरीदना है उसे अपने ट्रैक्टर पर लगाकर खेत में चलाकर जरूर देखें।

सही सेकेंड-हैंड इम्प्लीमेंट कैसे चुनें? 

सेकंड-हैंड इम्प्लीमेंट के सही चुनाव के लिए सबसे पहले अपने ट्रैक्टर की हॉर्सपावर (HP) देखें। अगर आपका ट्रैक्टर 35 HP का है और आप 45 HP का रोटावेटर ले लेंगे, तो ट्रैक्टर का इंजन जल्दी खराब हो जाएगा। हमेशा अपनी जरूरत और ट्रैक्टर की कैपेसिटी के अनुसार ही चुनाव करें।

सेकेंड-हैंड इम्प्लीमेंट खरीदने के फायदे 

  • कम पैसों में ज्यादा मशीनें खरीदी जा सकती हैं।
  • नई मशीन की वैल्यू पहले साल बहुत गिरती है, पुराने में यह नुकसान नहीं होता।
  • नई मशीन के लिए वेटिंग हो सकती है, पर सेकंड-हैंड इम्प्लीमेंट हाथों-हाथ मिल जाता है।

क्यों भरोसा करें ट्रैक्टर ज्ञान पर?

ट्रैक्टर ज्ञान सिर्फ जानकारी नहीं देता, बल्कि जमीन से जुड़ी सही सलाह देता है। हम मशीन की असली हालत, सही कीमत और काम की उपयोगिता, तीनों पर साफ बात करते हैं, ताकि किसान गलत सौदे से बच सके। क्योंकि खेती में मुनाफा मेहनत से आता है, गलती से नहीं।

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