चावल की ये अजीब किस्में, जिनके बारे में आपने कभी नहीं सुना होगा।
धान की खेती भारत में मुख्य रूप से की जाती है, बदलते दौर में किसान धान की कई किस्में अपना रहे है। भारत में चावल इतने लोकप्रिय है पर क्या आप जानते है दुनिया में धान की 40 हज़ार से भी ज्यादा किस्में है। पूरी दुनिया के अलग अलग इलाकों में पोषक तत्वों के आधार पर धान की हजारों किस्में पाई जाती है। हमारा भारत भी विविधताओं का देश है और यहां भी धान की कई किस्में पाई जाती है, इसलिए हम भारत में पाई जाने वाली धान की सबसे अजीब किस्मों की ही बात करते है। तो आइए जानते है अलग अलग रंगों, पोषक तत्वों और खासियतों वाली इन प्रमुख किस्मों के बारे में।
भूरे व लाल चावल:- भूरे रंग के चावल व लाल चावल धान की अलग अलग किस्में है पर रंग के अलावा पैदा करने की प्रक्रिया से लेकर पोषक तत्व तक सब कुछ एक जैसा होने के कारण हम इनकी बात एक साथ कर रहे है। भूरे चावल पूरे देश में पाए जाते है और इनके पोषक तत्वो के कारण ज्यादा से ज्यादा लोग इन्हे अपना रहे है, वहीं लाल चावल भारतीय उमहाद्वीप में हिमालय पर्वत, दक्षिण तिब्बत, भूटान और दक्षिण भारत में ही मिल सकते है।
काले व बैंगनी चावल:- दरअसल ये चावल की एक ही किस्म है, मूल रूप से काले रंग के ये चावल पकाने पर बैंगनी रंग में बदल जाते है। पोषक तत्वों और बीमारियों से लड़ने में मदद करने के मामले में काला धान लाल व भूरे रंग वाली किस्मों से बेहतर है और इसलिए भारत में भी अब किसान इसकी मांग को देखते हुए इसे अपना रहे है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में इसकी खेती अब बड़े स्तर पर की जा रही है।
सुंगंधित बासमती चावल:- बासमती चावल की खेती तो भारत में सबसे ज्यादा की है और इनकी मांग भी बहुत है, पूसा सुंगध, पंत सुंगध, नरेंद्र सुंगंध आदि नाम से बासमती की भी कई किस्में है जिनकी मांग बाज़ार में बहुत है। हालांकि बासमती की खेती भारत में सदियों से हो रही है पर आज इनकी मांग सर्वाधिक है।
आज वैज्ञानिकी तौर पर धान की नई नई किस्में विकसित की जा रही है और कई पुरानी किस्मों की मांग भी बाज़ार में बड़ रही है किसानों को चाहिए कि वो इनकी जानकारी रखे और जिसमें उन्हें सबसे अधिक लाभ हो उस किस्म की खेती करें।
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