70 लाख ट्रैक्टर प्रोडक्शन के साथ महिंद्रा फार्म इक्विपमेंट बिजनेस ने रचा इतिहास
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महिंद्रा ने एक ऐसा माइलस्टोन हासिल किया है जिस पर अभी जितना ध्यान दिया जा रहा है, उससे कहीं ज़्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए — 70 लाख ट्रैक्टरों का प्रोडक्शन। जी हाँ, सत्तर लाख। यह सिर्फ एक बड़ा नंबर नहीं है, बल्कि पिछले 6 दशकों से भारत के खेती-किसानी के भविष्य को संवारने की एक जीती-जागती कहानी है।
1963 से 70 लाख तक का सफर: एक लंबी और शानदार राह
महिंद्रा फार्म इक्विपमेंट बिजनेस ने ट्रैक्टर बनाने के इस सफर की शुरुआत साल 1963 में की थी। बीते दशकों में यह कंपनी सिर्फ बड़ी नहीं हुई, बल्कि प्रोडक्शन वॉल्यूम के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी ट्रैक्टर निर्माता कंपनी बन गई। आज के समय में यह मुख्य रूप से तीन ब्रांड्स के तहत काम करती है:
- महिंद्रा ट्रैक्टर्स (Mahindra Tractors): भारत का नंबर 1 ट्रैक्टर ब्रांड
- स्वराज ट्रैक्टर्स (Swaraj Tractors): भारत का नंबर 2 ब्रांड, जिसने 1974 में देश का पहला पूरी तरह स्वदेशी ट्रैक्टर बनाया था
- ग्रोमेक्स ट्रैकस्टार (Gromax Trakstar): वडोदरा से चलने वाला भारत का नंबर 1 रीजनल ट्रैक्टर ब्रांड
ये तीनों मिलकर 350 से ज्यादा मॉडल और वेरिएंट्स बाजार में उतारते हैं। मतलब इनके पास इतना बड़ा पोर्टफोलियो है कि यह बिहार के एक छोटे किसान से लेकर अमेरिका के टेक्सस में बड़े पैमाने पर खेती करने वाली कंपनी तक, हर किसी की जरूरत को पूरा कर सकता है।
साल 2026 रहा अब तक का बेस्ट ईयर
यह 70 लाख का रिकॉर्ड कोई तुक्का नहीं है। महिंद्रा एफईबी ने अभी हाल ही में फाइनेंशियल ईयर 2026 में 5.26 लाख से ज्यादा ट्रैक्टर बेचकर एक नया रिकॉर्ड बनाया है, जो उनका अब तक का सबसे शानदार सालाना प्रदर्शन है। इस दौरान उन्होंने कुछ बेहतरीन नए ट्रैक्टर्स भी लॉन्च किए, जैसे कि महिंद्रा 585 युवो टेक+ V1, नोवो प्रीमियम एडिशन और स्वराज प्रोटेक।
अब आगे की तैयारी भी पूरी है। कंपनी ने आने वाले समय के लिए पहले ही 7 नए ट्रैक्टर्स और 12 नए फीचर्स लॉन्च करने का ऐलान कर दिया है। यह दिखाता है कि कंपनी सिर्फ पुरानी कामयाबी का जश्न नहीं मना रही, बल्कि आने वाले कल के लिए कमर कस चुकी है।
एमएंडएम लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीईओ राजेश जेजुरिकर ने कहा कि जैसे-जैसे देश 'विकसित भारत' के अपने विज़न की ओर बढ़ रहा है, कृषि क्षेत्र में बदलाव लाना राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रहेगा... 70 लाख ट्रैक्टरों का यह मील का पत्थर हम सभी के लिए एक बेहद गर्व का क्षण है।
सिर्फ भारत नहीं, पूरी दुनिया में बज रहा है डंका
महिंद्रा का जलवा सिर्फ हमारे देश तक सीमित नहीं है। अमेरिका उनका दूसरा सबसे बड़ा मार्केट है, जहां वे पिछले तीन दशकों से जमे हुए हैं और वहां उनके दो असेंबली प्लांट्स भी हैं। आज महिंद्रा 50 से ज्यादा देशों में मौजूद है और उनकी नई 'ओजा' (OJA) सीरीज तेजी से दुनिया के बड़े बाजारों में अपनी जगह बना रही है।
चाहे कंसास (अमेरिका) या केन्या में चल रहा महिंद्रा ट्रैक्टर हो, या फिर तमिलनाडु के धान के खेतों में काम कर रहा ट्रैक्टर, दोनों के अंदर एक ही मजबूत इंजीनियरिंग का डीएनए है। दुनिया का यह भरोसा महिंद्रा को तोहफे में नहीं मिला, बल्कि उन्होंने इसे अपनी मेहनत से कमाया है।
हमारे किसानों के लिए इसके क्या मायने हैं?
देखा जाए तो ट्रैक्टर सिर्फ एक लोहे की मशीन नहीं है। यह हमारे लाखों किसान परिवारों के लिए साधारण गुजर-बसर और खुशहाली के बीच का सबसे बड़ा जरिया है। इन 70 लाख ट्रैक्टरों में से हर एक ट्रैक्टर उस किसान की कहानी कहता है जिसने कम समय में ज्यादा काम निपटाया, जिसने शारीरिक मेहनत को कम किया और अपनी पैदावार बढ़ाई।
महिंद्रा का जो मिशन है, "तकनीक को ज्यादा से ज्यादा सुलभ और उपयोगी बनाकर दुनिया भर के किसानों के जीवन को बदलना"—यह सिर्फ कागजी बातें नहीं हैं, बल्कि ये आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं।
ट्रैक्टर ज्ञान का नजरिया
70 लाख ट्रैक्टर बनाना वाकई एक बहुत बड़ी और बेमिसाल उपलब्धि है, लेकिन इससे भी ज्यादा काबिलेतारीफ बात यह है कि महिंद्रा यहां तक पहुंचा कैसे। यह पीढ़ियों से किसान भाईयों के साथ बनाए गए अटूट भरोसे की जीत है। सोचिए, स्वराज ने 1974 में भारत का पहला स्वदेशी ट्रैक्टर बनाया था और आज भी वह देश के सबसे तेजी से बढ़ने वाले ब्रांड्स में से एक है। यह साफ दिखाता है कि कंपनी कितनी दूर की सोच लेकर चलती है।
आने वाले समय में नए मॉडल्स और स्मार्ट एग्री मशीनरी पर महिंद्रा के भारी फोकस को देखकर लगता है कि यह 70 लाख का आंकड़ा उनके सफर का अंत नहीं, बल्कि एक नई और बहुत बड़ी उड़ान की शुरुआत है। और इस रफ्तार का सीधा फायदा हमारे भारतीय किसानों के साथ-साथ दुनिया भर के किसानों को मिलने वाला है।
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